खूबसूरती की क्या बात करें हम ,
नहीँ है कोई किताब
अमल करने को .
बस इतना ही समझ लिजै ,
किसी ने सूरत को देखा ,
किसी ने सीरत को देखा और
कहीँ नज़रों से बात हुई.
_ _ _ _ Aparna jha .
ये फोटो web images से ली गयी है .
Thursday, 20 August 2015
खूबसूरती
Friday, 14 August 2015
Aparna
जब कभी किसी पत्र विहीन वृक्ष को देखें तो उसे कभी वीरान मत समझियेगा . आप इस आकाश को गौर से देखिये , इसकी नीलिमा आपको शीतलता का आभास करायेगी . इसके कुंदन वरण और लालिमा, इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा रही है . आकाश में नित्य बनती ये आकृतियों को ज़रा ध्यान से देखिये . ये आपको अपने सजीवता का बोध करायेंगी . प्रकृति में ये कैसी समन्वयता, मानो नीले आकाश की सुंदरता ने इस पत्रविहीन पेड़ से अपनी परस्परता कायम कर ली हो और हम इस विहंगम दृश्य का नज़ारा कर रहे हैं .
बात बस इतनी -सी है कि पार्वती के " अपरणा " रूप में पहचान पाना , ये सिर्फ़ शिव की पारखी नज़र ही कर सकती थी .
राष्ट्रवाद
बचपन में किस्से-कहानियाँ जो सुनी थी ,
उन्हीं बातों को, सवालातों को
बड़े होने तक लिये चली थी .
अब मैं आजाद हूँ ,
अपने सोच की परवाज़ हूँ .
बस यही सोच के साम्यवाद अपनाया था ,
मार्क्स को अपना खुदा बनाया था .
जवानी में मार्क्सवाद का नशा ,
इतना सर चढ़ कर बोलेगा _
समाज बदलने की ताकत ,
खयालात बदलने की ताकत ,
मंदिर, मस्जिद, अट्टालिकाओं को
ढाहने की ताकत ,
एक समदृष्टि बनाने की ताकत
दिवास्वप्न में आने लगे .
नींद खुली तो पाया ,
हमने ही तो साम्यवाद में
घुन लगाया .
बस अब समझ में इतना आया_
" वाद " कोई भी बुरा नहीं होता ,
ये तो परिस्थितियाँ हैं, जो
इंसानों से समाजों में बन जाती हैं .
गरीबी में " साम्यवाद " ,
अमीरी में " साम्राज्यवाद
और बाजारवाद " ,
सोया रहा तो नित गुलामी ,
जग गया तो " क्रांति " पक्की .
Photo taken from net .