जब कभी किसी पत्र विहीन वृक्ष को देखें तो उसे कभी वीरान मत समझियेगा . आप इस आकाश को गौर से देखिये , इसकी नीलिमा आपको शीतलता का आभास करायेगी . इसके कुंदन वरण और लालिमा, इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा रही है . आकाश में नित्य बनती ये आकृतियों को ज़रा ध्यान से देखिये . ये आपको अपने सजीवता का बोध करायेंगी . प्रकृति में ये कैसी समन्वयता, मानो नीले आकाश की सुंदरता ने इस पत्रविहीन पेड़ से अपनी परस्परता कायम कर ली हो और हम इस विहंगम दृश्य का नज़ारा कर रहे हैं .
बात बस इतनी -सी है कि पार्वती के " अपरणा " रूप में पहचान पाना , ये सिर्फ़ शिव की पारखी नज़र ही कर सकती थी .
Friday, 14 August 2015
Aparna
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