Wednesday, 4 October 2017

दुर्गति नाशिनी : अजीब सी परिस्थिति !!!"

" दुर्गति नाशिनी :
अजीब सी परिस्थिति !!!"

हर बार की तरह इस बार भी रवीश के माँ-बाबूजी ने साल भर दशहरा पूजा के आने का इंतिज़ार किया ....
वो इस इंतिज़ार में थे कि शायद इस बार त्योहारों की छुट्टी में बेटा अपने परिवार संग उनसे मिलने आएगा....बेटे ने भी यही दिलासा दी थी उन्हें... पिछले साल ना आने पर...
क्या पता था वो छुट्टियां तो उसके अपने पाले हुए कुत्ते के लिए और परिवार के घूमने के लिए होती है...
पिता का इंतिज़ार...
और फिर रहा ना गया...
हेलो बेटा ... कहां हो! माँ तुम्हारे लिए खाना बना कर तुम्हारी राह देख रही है....
बाबूजी...घर में सभी तीन चार दिन के लिए बाहर गए हैं....आपलोग खा लीजिये....
मेरा आना जरा मुश्किल है...
मेरी तबियत ज़रा खराब हो गई है..
क्या हुआ बेटा???
मां कह रही है ऐसे में अकेले तुम परेशान हो जाओगे...हमलोग तुम्हारी देखभाल करेंगे....टैक्सी करके आ जाओ...
नहीं बाबूजी....कोई चिंता की बात नहीं....
तभी बाबूजी को फ़ोन पर कुत्ते की आवाज़ सुनाई पड़ी...भौं-भौं-भौं...
Aparna Jha

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