बचपन से ही सीता और द्रौपदी को ले हमेशा मन में सवाल उठते रहते थे पर डरती थी कि कहीं धर्म से जुड़ी बातें हैं कहीं तूफ़ां बरपा ना कर दे. परन्तु आज की बुद्धिजीवी स्त्री वर्ग संग कुछ बुद्धिजीवी पुरुष वर्ग भी इस चर्चा में भाग ले रहे हैं , बहुत खुशी हो रही है. हमारी महिलाएं इस विषय पर अपना पक्ष रख पा रहीं हैं ,अत्यंत हर्ष की बात. सच्चाई सब जानते हैं कि राम को राम बनाया सीता ने और धर्मराज युधिष्ठिर की भी कहानी यही ,वरना एक ने स्त्री को जंगल दिखाया और दूसरे ने जुए के दांव लगा दी. इतिहास गवाह है कि स्त्री के चारित्रिक सुदृढ़ता के बल पर तब सीता ,द्रौपदी आबाद किया और समय-समय पर ना जाने आजतक कितनी ही महिलाओं ने समाज निर्माण में योगदान किया है.
परन्तु सवाल तब भी यही था और अब भी यही कि स्त्री के पिछड़ापन के जिम्मेदार कौन ????
समाज या परिवार, या दोनों ही?
@Ajha.24.04.17.
Monday, 16 October 2017
जवाब किसके पास....
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment