आज अपने रुग्ण अवस्था में पड़ोसी के दादा जी अपनी दुखड़ा सुना रहे थे..."माँ-पिता विहीन हम दोनों पति- पत्नी से पूछे कि नीम के पेड़ की महत्ता क्या है.कितनी बार मुझे पत्नी की डांट सुननी पड़ी कि जब भी बोलते हो तो कड़वा ही बोलते हो...अब तो बच्चे भी बोलते हैं कि बाबूजी लगता है नीम का पत्ता खाकर पैदा हुए हैं..."
"अरे जाने दो शीला, तुम तो जानती हो ना मेरा स्वभाव.आज बच्चे कुछ भी बोलें,कल जब यही लायक हो जाएंगे तो इसी नीम के पेड़ पर वो गर्व करेंगे..."
"सुखद भविष्य की आस में मैंने कितना कुछ सहा पर अपने परिवार की जड़ को हिलने नहीं दिया...पर आज जब फल चखने की बारी है तो समझ में नहीं आ रहा कि वाकई ये बूढ़ा नीम सारे जीवन एक कड़वे फल की ही देखभाल करता रहा..."मैं चुपचाप बैठी सोच रही थी कि वाकई नीम का पेड़ इतनी कड़वाहट पैदा करता है!!!
अपर्णा झा
स्वरचित,मौलिक रचना
Saturday, 28 July 2018
नीम का पेड़
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