"शक"
"आज की ताज़ा खबर का पता लगा!"
"नही तो!"
"ऐसी क्या बात हो गई ???"
"अरे सुबह से ही ना जाने क्यों मन में उस फिल्म के विलेन की याद आ रही है...
देखो ना !फिल्म का नाम याद नहीं आ रहा..."
"किस फ़िल्म की बात कर रही हो भला, रचना....."
"अरे प्रीति, वही जिसमें नासिरुद्दीन शाह ग़ज़ल गायक के रूप में प्रत्यक्ष और परोक्ष में कुछ और ही छवि का इंसान...."
"हाँ,याद आया."
"कौन सी....." अरे तुम कहीं 'सरफरोश' की बात तो नहीं कर रही!!!"
"हाँ.. हाँ... वही-वही."
"लेकिन हुआ क्या !माज़रा क्या है....? कुछ तो बताओगी ..."
"हमारे पड़ोस में जो रमेश था....वही जिसकी समाज में बहुत पूछ थी...."
"हाँ हाँ...याद आया प्रीति..बहुत अच्छे से...."
"आज पता लगा कि उसने तो अपने अलग-अलग कई नाम रखे हुए हैं.अपनी सुविधा और परिस्थिति के अनुसार नाम बदल लेता है.आज ही अख़बारों के माध्यम से पता लगा कि वह अपने अलग अलग नामों से फेसबुक पर भी है.कहीं शिक्षाविद,कहीं धर्मतटस्थ और कहीं जातिवाद और धर्मगत के पोस्ट डालता है. उसके चाहनेवालों की लंबी कतार है".
"पर रचना ! इस सब से क्या हासिल...."
तभी अर्पिता ने बीच में ही रोकते हुए कहा....अरे ऐसे व्यक्तित्व का कोई ठिकाना नही....
ऐसे लोग सदैव रहस्यमय होते हैं जिन्हें अपने ही बारे में कुछ पता नही...और ऐसे ही इंसान बहकावे का शिकार होता है.
मुझे तो यह इंसान शुरु से ही रहस्यमय लगता था....समझ में नही आता कि मेरा शक सही या नहीं.....क्या ऐसे लोगों की दोस्ती सही या नहीं.....
Aparna Jha
Saturday, 28 July 2018
शक
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