Saturday, 28 July 2018

ख़त

"ख़त"
आज सुशीला अपने पति का ख़त पढ़ रही थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे अब सोचना क्या है!
एक वो प्यार भरा ख़त जब सुशीला के पति ने उसे शहर जा कर लिखा था, "मैं बहुत अकेला हो गया हूँ,मैं तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊंगा..."
सुशीला ने इस एक खत के सहारे जीवन के 25 साल मुस्कुराते निकाल दिए.आज इतने सालों बाद ये ख़त कि "मेरा इन्तिज़ार ना करना,मैं अब तुम्हारे जिंदगी में शामिल नहीं..."
सुशीला की मां हैरान थी...
"काग़ज़ का टुकड़ा ही तो था और उस पर चंद अल्फ़ाज़... भला जीवन में इतना तूफान भर देगा, सोचा ना था."
अपर्णा झा

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