1924-2018 श्रद्धांजलि "
श्री अटल बिहारी वाजपेयी"
समय आखिर रुक गया.मौत से जो ठनी थी,बेशक मौत ही जीत गई, परन्तु जीवन का अर्थ क्या हो...उसके लिये एक नाम काफ़ी है "अटल बिहारी वाजपेयी." राजनीति जैसे क्षेत्र में अपने दामन को पाक रख 94 साल का सफर पूरा किया,अपने लिये एक काफिला बना लिया...जहां भी उपस्थित होते एक खुशनुमा माहौल बन जाता था.अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपना एक इतिहास लिख जाना कोई आसान नहीं.क्या खास और क्या आम...हम तो कई दिनों से खबरों से ही जुड़े थे.लोगों की खुशी इनके व्यक्तित्व से और आज लोग के लिये भावुक समय...मैं खुद को खुशनसीब मानती हूँ कि उनकी जीवनी को मैंने भी देखा और सुना.चाहे किसी मंच से वो बोल रहे हों या संसद में विश्वास प्रस्ताव पर भाषण हो या फिर पोखरण की बातें या फिर अटारी से मैत्री संबंध वाली बस का पूरा सफर...
राजनीति का साहित्य में या कहें साहित्य में राजनीति का ऐसा सुंदर विलय जिसमे आत्मविश्वास का भाव-भंगिमा क्या कमाल का था...ऐसे लोगों का शरीर पार्थिव हो जाना समाज के लिये वास्तव में एक नगीने को खोने के समान है.मेरे बाबूजी Bageshwar Jha और माँ ने अपना पूरा जीवन इन महान शख्सियत को अनुसरण करते बीता. आज शायद उनके भी दुख की सीमा अपरिमित हो.
ऐसे महान शख्सियत को नमन.
Thursday, 16 August 2018
1924-2018 श्रद्धांजलि,अटल बिहारी वाजपेयी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment