Monday, 27 August 2018

राजनगर,पधारो मिथिलांचल में

बिहार उदासीन,और उसपर से मिथिलाधाम का हाल मत पूछिए जनाब.कितनी सरकारें आईं और चलीं गईं और सरकारों की उदासीनता मिथिलांचल को 'heritage city' बना नहीं पाई.एक ऐसा इलाका जिसमें प्रकृति की प्रचुरता,साहित्य,संगीत,भाषा,संस्कृति और इतिहास का खज़ाना, गांव की हर महिला में सीता का वास (पाक शास्त्र संपन्ना जिस के लिए कभी उन्हें कोई शैक्षणिक संस्थानों का सहारा ना लेना पड़ा हो,विरासत संरक्षिका हर एक महिला)...विरासत ही काफी है ऐसी शिक्षा हेतु.
मुझे लगता है कि मिथिलांचल की गिरती स्थिति का कारण यह भी हो कि ना तो यह राजकीय राजधानी के नज़दीक है और केंद्रीय राजधानी तो कोसों कोस दूर... और इस कारण सरकारों का ध्यान दिलाने पर भी इस ओर नज़र नहीं जाती.
आज यदि राजस्थान और गुजरात की तरह इस पर भी ध्यान दिया होता तो मैं भी गर्व से बोलती,मेरा ससुराल 'राजनगर' है.'राजनगर' यानि
एक ऐसा नगर जिसमें ब्राह्मण राजाओं की पुश्त दर पुश्त ऐसी श्रृंखला बनी जो अपने समय से आगे की सोच रखते थे.जिन्होंने अपने शिक्षा संस्कृति और समाज के उत्थान हेतु विश्वस्तर के महारथियों को अपने यहाँ बाइज़्ज़त जगह दी.बुद्धिजीविता का प्रमाण पत्र भी यहीं आकर ही पूरा होता था....
काशकि सरकारों की नज़र  गंभीरतापूर्वक इस ओर भी जाए.वर्तमान में खुशी की बात इतनी है कि अब यहां के लोग खुद की सोच से उठ अपने गौरवपूर्ण इतिहास को झांकने लगे हैं,आँकने लगे हैं.देखना बस इतना है कि राजनीति इसे किस प्रकार से मदद करती है.हम भी सोचें,आप भी सोचिये और यदि जिज्ञासु हैं तो शामिल होइए 'मिथिला लिटरेचर फेस्टिवल,राजनगर,मधुबनी में जिसका मुख्य आयोजन 18-21दिसंबर '18 को आयोजित किया जाएगा.जिसमें मिथिलांचल से संबंधित हर पहलू पर विमर्श और सांस्कृतिक आयोजन भी किये जायेंगे.
तो पधारे मिथिला नगरी.
अपर्णा झा

छवि :#सविता झा खान के वाल से.

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