"एकटा गाम हमरो छल...."
आय भोर,प्रातःकालीन चाय सँगे बैसल छलौंह आ रामायण के बाल कांड लागल छल, हम पतिदेव के कहलियन्हि...एखनो तक अहि के सुन' से मोन अघाय नहि अछि.ओ ता अप्पन बाल्यावस्था में पहुंची गेलाह..."कोना भोरे भोर आ साँझ मंदिर के आरती आ पोखरी में नहेनाय,सप्ताह के दिन तय कोनो न कोनो घर में,जाहि में बच्चा सब रामायण पाठ करै.छोट बच्चा सबके पता छल जे कत्त' पाठ होइ वला छै आ ताहि लेल फूल सब तोड़ि इकट्ठा क' ओहि घर बच्चा सब द' आबै. ताहिना नाटक मंचन ,फुटबॉल आ क्रिकेट मैच आ ताहिना अनेकों उत्सव खूब सुंदर सा हाथे-पाथे भ' जाय.पढनाय-लिखनाय,संबंध निभेनाय,आदर-सत्कार सब, छोटकी सब अपन जेठ सा खेले-खेल में व्यावहारिक जीवन आ तहज़ीब सीख लै.मीडिया मात्र कनि रेडियो आ mouth to mouth communication छल, तहियो गामक जीवन में एकटा तारतम्य छल, सांस्कृतिक झलक सेहो...मुदा प्रगति जीवन चक्र के एकटा महत्वपूर्ण अंग अछि आ ताहि से भेल बदलाव जेकरा कि रोकल नहि जा सकैत अछि आ तैं ओ प्रभाव गावों पर पड़ल... की नीक आ की बेजा सब किछु प्रत्यक्ष अछि...
आब गाम शहर बनल जा रहल अछि आ शहर अप्पन गामक अस्तित्व के खोजबा में ओकर बाजारीकरण क' देलक.आब हम सब क्राफ्ट बाजार,प्रदर्शनी हेरिटेज होटल ग्रामशिल्प आ हाट में टिकट किन पाय ख़र्च क' ओहि अप्राकृतिक रूप से गढल ग्रामीण परिवेश से किछु क्षण के लेल अपना के जी लै छी आ अप्पन नौनिहाल सब के गांवक परिचय सेहो अहि माध्यमे देबाक प्रयास करैत रहैत छीयै.
आब ता बहुतों लोक पायक मामला में सक्षम छैथ आ गाम बदलबा के जज़्बा राखैत छैथ ओ सब वापस गामक दिसन आबि रहल छैथ.
अपर्णा झा
Tuesday, 14 August 2018
एकटा गाम हमरो छल
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment