मेरी नज़र में "सेरोगेसी"
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सुषमा स्वराज जी का "सेरोगेसी " पर बयान अब बहस का मुद्दा हो चला है. अभी nd tv पर इसी मुद्दे पर बहस भी छिड़ी है सोचा एक नागरिक होने के नाते अपनी भी बात कहूँ. कोख खरीदना सिर्फ रसूखदार लोगों का शौक बन गया है इससे किसी आम तबके के लोगों की जरुरत पूरी नहीं हो सकती है. मेरा अपना मत यह है कि क्या ऐसे लोगों के लिए अनाथाश्रम एक विकल्प नहीं हो सकता. जहाँ बच्चे माँ-बाप के लिए तरस रहे हैं, इनका शारीरिक और मानसिक शोषण भी होता है, कई बार गलत कार्यों में भी झोका जाता है. ऐसे बच्चों को यदि एक परिवार मिल जाए तो शायद समाज का भला तो होगा ही, भगवान के घर का इन्तजार भी नहीं होगा.
एक तरफ जनसँख्या नियंत्रण की बात होती है और दूसरी तरफ अपने बच्चे होते हुए भी पैसे के बल पर कोख खरीदते हैं क्या यह उचित है? मेरी नज़र में ऐसे लोगों को सम्मान की दृष्टि से भी देखना मैं उचित नहीं समझती, और इस कारण जनाब सलीम खान साहब के लिए आदर बढ़ जाता है जिस तरह से उनहोंने अर्पिता को अपनाया.
ऐसे विषयों पर बहुत ही सोच समझ कर निर्णय लेने की आवश्यकता है.@Ajha.
Tuesday, 28 August 2018
मेरी नज़र में सेरोगैसी
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