Tuesday, 28 August 2018

हमर स्मृति के गाम

की गाम आब ओ गाम रहल!
हम्मर गामक कल्पना में बाबा सब आदर के पात्र छलाह जे भोर साँझ अप्पन देश राग गाबथि छलाह,रामायण बाँचैत छलाह,बाबा धर्मग्रंथक सिद्धहस्त आ मैंयासब संस्कृति संरक्षिका, ओ लाल कक्का आ छोटका कक्का आ भैया सब हीरो छलाह जे गामक हर मुसीबत में एक जुट भ' स्थिति के सुतारि लैत छलाह.काकी,भौजी सब तेहेन बुझनुख जे किनको दलान पर पाहुन एलान आ घरे-घर से खान पाक सचार पाहुन के आगाँ लागि जाइत छल. साँझक भगवती डीह कत्ताको खिस्सा कहैत छल. कनिया-मनिया सबहक मिलन स्थान छल. नवतुरिया सबके भजन गान के संग क्रांति गीतक सेहो एतहि से आरम्भ होय.
अहि बात से मनाही नै कि प्रगति के बयार गाम में नहि चलल,मुदा अही के आड़ में विकृति समाज में ओहि से बेसी आयल अछि.
हम पहुलका गाम के मोन में बसेने छी,मुदा आब जहिया-कहियो गाम जेबाक मौका भेटैत अछि त' अंत परिणाम यहा बुझाइत अछि जे छोट कि पैघ कोठली शहर में,भूखल छी कि सुतल कम से कम शांति त' अछि.यदि हम नहि चाही हर-हर, खट-खट केनाय ता कियो उकसेबो त' नै करत...
अप्पन स्मृति में जे गाम बसल अछि ताहि लेल अपनाके भाग्यशाली बुझैत छि जे कम से कम ओहो दिन देखने छी.बीचक उदासीनता वला स्थिति बड्ड भयावह बुझाइत छल मुदा आब अप्पन देस,भाषा,संस्कृति आ इतिहास के पुनर्जागृत करबाक वर्तमान कालक प्रयास सराहनीय अछि.ख़ुशी के बात ई अछि जे आब ई जागरुकता अभियान नीक-नीक शिक्षित लोक सब अप्पन हाथ में उठा लेलैथ,जाहि में living legends के अप्पन आदर्श मानि बाहरी दुनिया के प्रगति से मिथिलांचल के जोड़बाक प्रयत्न भ' रहल अछि.हम वर्तमान मिथिला के एकटा नब आ पुरान कालक सोच के संधि काल मानैत छी जाहि से तपि के सोना कुन्दनक प्रमाण अवश्य देताह.
अपर्णा झा

*इमेज : आदरणीय गंगेश गुंजन जी के वाल स'

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