बिलकुल सही कहा. संस्कारों में रहना कोई बुजदिली ,डरपोक या कमजोर होने की अलामत नहीं बल्कि आपकी बातों को बर्दाश्त कर जाना उसके महानता का परिचायक है ,चाहे भले ही उम्र में छोटा हो या बड़ा.@Ajha.27.11.16
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