"खुशी"
जो खुश रहना चाहता है वह किसी भी परिस्थिति में अपनी खुशी तलाश ही लेता है, उसके निकट चाहे कोई कितना भी विसंगत हो पर वह उसमें भी अभिव्यक्ति की गुंजाइश देख ही लेता है. ये तो खुद का नज़रिया है कि पत्थर में भगवान और इंसानों में शैतान ढूंढ लेता है.
खुश रहने वालों को खुदा की तलाश नहीं और दुखी रहने वालों को खुदा दिखता नहीं...
और ऐसे में भटकाव की स्थिति...
तंत्र,मंत्र और जादू टोना....
बस और बस यही कि खुद को एवं अपने आस-पास को खुद के ख़यालों से प्रदूषित करना...
Aparna Jha
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