आशा हाँफते-हाँफते आफिस पहुँची, तभी रेखा ने रोका_ "अरे कहाँ भागी -भाग जा रही हो ,एक कप चाय हमारे साथ पी तो लो !"
"अरे नहीं रेखा अभी-अभी ऑफिस पहुंची हूँ, ज़रा बॉस के सामने हाज़िरी बजा तो लूँ."
आशा बॉस (राजेश) के कमरे में पहुँचती है_"क्या बात है ,तबियत तो ठीक है, छुट्टी कर लेतीं."
"नहीं सर,ऐसी कुछ ख़ास बात नहीं . बस आज बहू की तबियत कुछ खराब हो गई थी, उस पर से कोई महत्वपूर्ण इंटरव्यू भी आज ही उसे देना था.डॉक्टर के पास जाने से उसने मना कर दिया था, शायद समय की कमी थी.ऐसे में उस उसके हाल पर तो छोड़ नहीं देती.फिर इंटरव्यू का मामला.अपने समझ में जितना आया उतने घरेलु नुस्खे से अपनी बहू के तबीयत को ठीक करने का प्रयास भी किया.अभी उसे साक्षात्कार केंद्र पहुंचा कर आ रही हूँ.सोचा अब ऑफिस की फाइलों को भी ज़रा निबटा लूँ.
राजेश आशा की तरफ बड़े ही आश्चर्यचकित हो कर देख रहे थे.वह सोच रहे थे की इतनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी आशा अपने (प्रौढ़ावस्था)जीवन से कितनी संतुष्ट है.उसके चेहरे पर छाई ख़ुशी और तेज़ देखते बनता था.आशा भारतीय परिधान में रहने वाली ,अपने उत्तरदायित्व के प्रति ईमानदारी रखने वाली एक विदुषी महिला थी .आज राजेश की पत्नी ने ना जाने कितनी ही जली-कटी बातें अपने बहु को सुनाई थी.
राजेश अभी अपनी चिंतन की दुनिया में खये थे ,तभी आशा ने कहा _"आज शुभा (बहु का नाम)
अपनी मां के पास होती तो ममतामयी छाँव मिलती, भला एक कामकाजी सास, माँ की तरह कहाँ प्यार कर पाएगी.
अच्छा तो मैं चलूं अपनी सीट पर,कई सारे फाइल निपटाने हैं......."
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