Monday, 21 August 2017

टोना टोटका

"टोना-टोटका"

"बेटा, इसे मत खाना..."
"क्यों मम्मी???"
"उस आंटी ने दिया है..."
"पर वो तो बहुत प्यार करती है हमें ..."
"और फिर आपसे अच्छा खाना बनाती है..."
"कह दिया ना एक बार ....नहीं खाना है तो नही कहना है.."
"देखो मम्मी, दादी ने कितना सुदर ड्रेस दिया है.... ब्रांडेड है."
"तो क्या हुआ??? नहीं पहनना है. इसे मैं कामवाली को दे दूँगी...."
"मम्मी ये क्या बात हुई ,कोई कुछ भी लाता है , ना तुम मुझे ना ही पापा को खाने देती हो ना पहनने देती हो. ऐसी सभी चीजें या तो कामवाली को या भंगियों को बांट देती हो...
क्यों करती हो ऐसा???"
नानी यह सब करतूत देख रही थी.सोच रही थी_ "हमने अपने जीवन में कभी तो ऐसा नही किया, पर अपनी ही बेटी को इस तरह से करते देख रही हूं....
अपने पति से बातों को छुपाना, और दूसरे के प्रेम को नज़रंदाज़ करना....
हे भगवान ! ये कैसा समय आ गया.... यहां मेरी बेटी ऐसा कर रही है...
मेरी बहु भी कहीं मेरे लिए ऐसा तो नहीं कर रही होगी...!!!"
"बेटी, आज तुम्हारे यहां आए कितने दिन हो गए.जो कुछ में देख रही हूं ...कुछ भी तो अच्छा नहीं हो रहा..
बच्चे एवं पति को तो तुम कुछ जानने ही नही दे रही. सगे संबंधियों का दिया सबकुछ तो तुम घर से निकाल देती हो. यहां तक कि नवरात्रि के कनजिक पूजा का प्रसाद भी बच्चों को खाने नही देती. उसे भी भिखारियों में बांट देती हो . बच्चे प्रेम की भाषा समझेंगे भी तो कैसे.जो बरक्कत तुम्हे होनी चाहिए वो तो तुम कामवालियों को दे देती हो. पति के कानों कान भी खबर नही होने देती हो."
"ऐसा भला तुम क्यों कर रही हो...
क्या तुममें आत्मविश्वास की कमी है???
ऐसा कर कहीं तुम खुद को ही धोखा तो नहीं दे रही???
.....साथ ही तुम कहीं बच्चो के भावी भविष्य के संग खिलवाड़ तो नही कर रही..."
"सोचना जरूर, अच्छा तो मैं चलती हूँ, भगवान तुम्हें सुबुद्धि दे....."
Aparna Jha

No comments:

Post a Comment