Wednesday, 23 August 2017

स्वच्छता का प्रतीक

"स्वच्छता का प्रतीक......"

कुछ तीन चार दिन हुए मुझे दिल्ली से रांची गए हुए.झारखंड के रास्ते सुबह के नजारे भी दिख रहे थे .प्रकृति की छटा देख मैं मुग्ध हुये जा रही थी पर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही दिखी. जहां स्वच्छता के प्रतीक और अनरोइड फोन से लोग रूबरू हैं _इससे अलग एक तस्वीर और भी है . कई जगहों पर पानी के छोटे -छोटे जमाव जिसे पोखर भी कहना उचित ना होगा ऐसे पानी के जमाव में एक तरफ मवेशी जलमग्नआनंद ले रहे थे और दूसरी तरफ स्त्रियां सुबह का स्नान कर रहीं थीं .इससे आगे की तस्वीर और मिलती तबतक रेल अपने गंतव्य के लिये आगे बढ़ चुकी थी.हैरानी इतनी थी  कि उन सजीव तस्वीरों को में कैद भी नही कर पाई . बस अचंभित आंखों से विलीन हुए दृश्यों को सामने घूमता हुआ पाया रही थी. ना जाने ऐसे परिप्रेक्ष्य में लोग जी कैसे रहे हैं.
@अपर्णा झा.

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