ना मैंने किसी भी शायर को अनुसरण किया और ना ही खासतौर से पढ़ा. अपने पढ़ाई के तौर पर जो कुछ भी पढ़ा बस शायद उसका कुछ अक्स बाकीं हो,जिसका की मुझे कभी अंदाजा नहीं और 2015 , शायद मई का महीना हो एक सुबह किसी की पोएट्री के जवाब में जुगलबंदी क्या कर दी , आज मैं भी लिखने लगी. मुझे अपने इस बात का कभी सपने में भी ज्ञान ना हुआ. घर परिवार सभी हैरान हुए आज तक बैठे हैं. 😊
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